15 दिन बाद मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मीसाबंदियों (लोकतंत्र सेनानियों) बंद की गई पेंशन पर यू टर्न ले लिया है। सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि मीसाबंदियों के भौतिक सत्यापन के बाद पेंशन फिर से शुरू की जाए। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवरात सिंह सरकार के आदेश की कॉपी ट्वीट करते हुए टू टर्न लिखा है।
सन 1977 में आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को मध्यप्रदेश की तात्कालीन सरकार पच्चीस हजार हर महीने पेंशन के तौर पर देती थी। इस पर प्रतिवर्ष करीब 70 करोड़ रुपए खर्च हो रहे थे। सरकार ने पेंशन वितरण रोके जाने का प्रमुख कारण महालेखाकार की उस रिपोर्ट को बताया है जिसमें महालेखाकार ने पिछले वित्तीय वर्षों में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि में भुगतान को बजट प्रावधान से अधिक का बताया था।
सरकार ने लगाई थी रोक: सरकार की तरफ से सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से प्रदेश से सभी संभाग के कमिश्नर और कलेक्टरों को दिए निर्देश में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के राशि के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद मीसा बंदियों को पेंशन मिलना बंद हो गई थी। इस संबंध में पिछले सप्ताह ग्वालियर की हाईकोर्ट बैंच में एक याचिका भी दायर की गई थी। भाजपा नेताओं ने सरकार के इस फैसले को विरोध करते हुए इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया था। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि भाजपा से जुड़े लोग फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे हैं।
क्या लिखा आदेश में: सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 15 जनवरी को देर शाम जारी किए गए आदेश में समस्त आयुक्तों और और कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि लोकतंत्र सेनानियों के भौतिक सत्यापन आश्यकता है। राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि लोकतंत्र सेनानी या दिवंगत लोकतंत्र के आश्रित का भौतिक सत्यापन की कार्यवाही स्थ्ल पर जाकर कराई जाए। उनके बारे में स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद लोकतंत्र सेनानियों को फिर से निधि दी जाए।
इंदौर और भोपाल में मेट्रो चलेगी या मोनो रेल ये बात अगले महीने साफ हो जाएगी। सरकार ने मेट्रो की ज्यादा लागत को देखते हुए अब दोनों शहरो में मोनो रेल प्रोजेक्ट लांच करने पर विचार कर रही है। इसका प्रजेंटेशन तैयार है। जल्द ही अधिकारी इसे मुख्यमंत्री कमलनाथ को दिखाएंगे। मेट्रो प्रोजेक्ट को जमीन पर लाने से पहले ही प्रदेश सरकार इस पर 75 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि बीते साल के अंतिम दिनों में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में कहा था कि मेट्रो की लागत ज्यादा आती है और जगह भी ज्यादा लगती है। इसकी तुलना में मोनो रेल में लागत भी कम और इसे मेट्रो की तुलना में आधी जगह में ही चलाया जा सकता है। इसलिए वे इंदौर भोपाल में मोनो रेल के बारे में विचार कर रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता जाफर का कहना है कि सरकार ने अभी मेट्रो प्रोजेक्ट को बंद नहीं किया है। मोनो रेल पर भी विचार किया जा रहा है। जो काम अच्छा और कम लागत में होगा उसे किया जाएगा। अगले महीने तक सबकुछ साफ हो जाएगा।
75 करोड़ खर्च: 10 साल से कागजों पर दौड़ रही मेट्रो पर 75 करोड़ खर्च हो चुके हैं। अब प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मेट्रो चलेगी या मोनो, कब चलेगी? इन प्रश्नों का जब तक पूरी तरह जवाब न मिल जाए तब तक शहर के ट्रैफिक की मौजूदा दिक्कतों को दूर करने के लिए फ्लायओवर, ग्रेड सेपरेटर और सब वे निर्माण पर भी दोबारा विचार हो सकता है। भोपाल में महापौर आलोक शर्मा ने कहा कि अगर शहर की यातायात व्यवस्था सरकार को सुधारनी है तो सरकार भोपाल में चार-पांच फ्लाईओवर बनवा दे।
पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर ने जताई थी आशंका: पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने दावा किया है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल और इंदौर के मेट्रो प्रोजेक्ट होल्ड कर दिए हैं। दोनों शहरों में मोनो रेल के संचालन पर विचार किया जा रहा है। गौर ने दैनिक भास्कर से चर्चा में बताया कि पिछले दिनों दिल्ली में मप्र भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में उनकी कमलनाथ से मुलाकात हुई थी। गौर के अनुसार यहां आपसी चर्चा में कमलनाथ ने उनसे कहा था कि दोनों शहरों के मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत बहुत अधिक है। मोनो रेल पर इससे कम राशि खर्च होगी।
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