लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मुंबई कांग्रेस अंदुरूनी गुटबाजी से जूझती हुई नजर आ रही है. मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के नेतृत्व के खिलाफ राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले मिलिंद देवड़ा ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिया है. देवड़ा ने कहा है कि पार्टी में जो कुछ चल रहा है, उससे वो बिल्कुल भी खुश नहीं हैं. इससे मुंबई कांग्रेस के अंदरूनी कलह को बखूबी समझा जा सकता है. ऐसे में 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी से कांग्रेस कैसे मुकाबला करेगी?
बता दें कि मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट करके कहा है कि संजय निरुपम किसी को साथ लेकर चलना नहीं चाहते, जो पार्टी के लिए चुनाव से पहले घातक है. इससे पहले मुंबई कांग्रेस में ऐसा कभी नहीं हुआ है. देश की आर्थिक और सांस्कृतिक शहर मुंबई में हमें लोगों को साथ लाने की जरूरत है. मुंबई कांग्रेस सांप्रदायिक राजनीति के लिए एक क्रिकेट पिच नहीं बन सकती है, जिसमें नेता एक दूसरे के खिलाफ खड़े किए जाएं.
उन्होंने आगे के ट्वीट में लिखा, 'जो हो रहा है उससे मैं निराश हूं और पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ने के मेरे रुख से अवगत है. हालांकि मुझे केंद्रीय नेतृत्व और हमारी पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति उनका पूर्ण विश्वास है. विशेष तौर पर मुंबई में, जहां कांग्रेस का जन्म हुआ.
दरअसल, मुंबई कांग्रेस की सियासत दो धड़ों में पहले से ही बटी रही है. एक धड़े की अगुवाई गुरुदास कामत करते रहे तो दूसरा गुट मुरली देवड़ा का था. मौजूदा समय मुरली देवड़ा के सियासी विरासत को मिलिंद देवड़ा संभाल रहे हैं. अगस्त, 2018 में गुरुदास कामत का निधन हो गया है. इस तरह से कामत गुट के कुछ लोग मिलिंद के साथ जुट गए हैं और कुछ लोग मुंबई कांग्रेस महासचिव धर्मेश व्यास के साथ जुड़ गए.
संजय निरुपम के शिवसेना से कांग्रेस में आने और मुंबई अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने गुरुदास कामत और मुरली देवड़ा गुट के लोगों को दरकिनार कर अपनी टीम खड़ी की है. निरुपम ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के नाते विपक्ष में रहकर संघर्ष कर वो मुंबई में कांग्रेस का चेहरा बनकर उभरे हैं. महाराष्ट्र की चाहे बीजेपी सरकार को घेरना हो या मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करना हो. इन दोनों कामों वो लगातार कर रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि इन सब आंदोलनों में संजय निरुपम का साथ देने सड़क पर कोई बड़ा कांग्रेसी चेहरा नजर नहीं आया.
संजय निरुपम के बढ़ते वर्चस्व के खिलाफ पिछले 6 महीने से कई प्रतिनिधि मंडल ने कांग्रेस आलाकमान से मिलकर उनके खिलाफ शिकायत की है, लेकिन अभी तक उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी. इतना ही नहीं सितंबर 2018 को महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रभारी मल्लिकार्जुन खडगे से मुंबई में मिलिंद देवड़ा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने मुलाकात कर संजय निरुपम को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने की बात रखी थी. मल्लिकार्जुन खडगे से मुलाकात के बाद असंतुष्ट नेताओं को उम्मीद थी निरुपम के खिलाफ आलाकमान कुछ कदम उठाए जाएंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ. इसी के बाद से असंतोष और भी ज्यादा बढ़ गया.
दरअसल, संजय निरुपम से खिलाफ मिलिंद देवड़ा की टकराव की एक बड़ी वजह मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट भी मानी जा रही है. गुरुदास कामत इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरते रहे हैं, जिस पर संजय निरुपम दावा कर रहे हैं. इसी सीट पर कृपाशंकर सिंह भी चुनाव लड़ना चाहते हैं.
हालांकि, संजय निरुपम 2009 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से मैदान में उतरना चाहते थे, लेकिन कामत के दबाव में मुंबई उत्तरी सीट से चुनाव मैदान में उतरने पर राजी हुए थे. अब 2019 के रण में कामत की संसदीय सीट से निरुपम दावेदारी जता रहे हैं. ऐसे में मिलिंद को कृपा शंकर सिंह का साथ भी मिल गया है और उन्होंने संजय निरुपम के नेतृत्व के खिलाफ अभियान चला दिया है. इससे साफ जाहिर है कि मुंबई कांग्रेस में अंदरुनी गुटबाजी का पानी खतरे के निशान के बहुत ऊपर बह रहा है.
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